Thursday, May 26, 2011

अब कैसे कहूं याद आ रही है

वो जो हर पल
नैनों में समाये रहते हैं
जहाँ पलकें भी
स्थिर हो  जाती हैं
दृष्टि निर्मिमेष
हो जाती है
वहाँ कैसे कहूँ
याद आ रही है

वो जो हर पल
धड़कन में
समाये रहते हैं
मुरली मधुर बजाते हैं
मुझे हरदम
नाच नाचते हैं
वहाँ कैसे कहूँ
याद आ रही है

वो जो हर पल
सांसों के मनकों में
समाये रहते हैं
हर आती जाती
सांस संग धड़कते हैं
सांसों की आवाजाही में
मोती बन चमकते हैं
वहाँ कैसे कहूँ
याद आ रही है

याद तो उसे करूँ
जिसे भुलाया हो कभी
याद तो उसे करूँ
जिसे बिसराया हो कभी
जो स्वयं से जुदा
 हुआ हो कभी
याद तो उसे करूँ
जो अलग वजूद
बना हो कभी
जो मुझमे समाया रहता है
जिसमे मैं समायी रहती हूँ
जहाँ जिस्मों से परे
आत्मिक मिलन
हो गया हो
वहाँ कैसे कहूं
याद आ रही है
कोई तो बता दे
अब कैसे कहूं
याद आ रही है

31 comments:

  1. ह्रदय के विवश भावों का सटीक चित्रण....बहुत सुंदर।

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  2. तुम ही अन्दर तुम ही बाहर ..कब अलग हुए जो याद करूँ ?



    अलौकिक, शाश्वत एवं अमर प्रेम की सुन्दर रचना ....

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  3. Sach hee to kaha aapne....jo har waqt saath ho,jise kabhee bisraya hee nahee,use yaad kya,aur kaise karna?

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  4. याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जिसे बिसराया हो कभी
    जो स्वयं से जुदा
    हुआ हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी
    जो मुझमे समाया रहता है
    जिसमे मैं समायी रहती हूँ
    जहाँ जिस्मों से परे
    आत्मिक मिलन
    हो गया हो
    वहाँ कैसे कहूं
    याद आ रही है
    कोई तो बता दे
    अब कैसे कहूं
    याद आ रही है
    ek ek ehsaas saansen le rahi hain

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  5. जिसे भुलाया नहीं कभी , कैसे कहें की याद किया ...
    भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

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  6. आपकी कविता में नदियों का प्रवाह होता है... लहराती हुई बढती हैं... सुन्दर कविता...

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  7. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (28.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  8. यही तो सच है, सार्थक अर्थगम्भीर रचना!!

    याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जिसे बिसराया हो कभी
    जो स्वयं से जुदा
    हुआ हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी

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  9. याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी
    जो मुझमे समाया रहता है
    जिसमे मैं समायी रहती हूँ
    जहाँ जिस्मों से परे
    आत्मिक मिलन
    हो गया हो

    बहुत भावमयी प्रस्तुति ... जहाँ कुछ अलग ही न हो तो याद किसे किया जाये .. जहाँ आत्मा परमात्मा का मिलन हो तो कुछ शेष नहीं रहता

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  10. याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जिसे बिसराया हो कभी
    जो स्वयं से जुदा
    हुआ हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी
    बहुत खुब सुरत

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  11. स्मृतियों का भँवर है, जितना प्रयास करते हैं, डूब जाते हैं।

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  12. याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी
    आध्यात्मिक भावभूमि पर मानवीय भावों से सजी रचना बहुत अच्छी लगी.

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  13. याद की सुन्दर परिभाषा | साधुवाद !

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  14. वह वंदना जी बड़े दिनों बाद बरसाने कि दुलारी के दर्शन हुए आपकी कविता में ...राधा देखूं या मीरा मैं....याकि फिर दोनों ....निपट पीर होती तो बेहिचक मीरा ही कहता मैं ...मगर यहाँ तो अधिकार भी है ना..मिलन भी है ना और आपके इस याद करने के अनोखे ढंग ने तो जान ही निकाल दिया !

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  15. आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया...

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  16. आत्मिक मिलन के बाद यादों का क्या काम

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  17. शाश्वत एवं अमर प्रेम की सुन्दर रचना, भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  18. याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जिसे बिसराया हो कभी
    जो स्वयं से जुदा
    हुआ हो कभी……
    ह्रदय के विवश भावों को बहुत सुन्दरता से उभारा है ……

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  19. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..आभार

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  20. साँसों की माला में सुमरू मैं पी का नाम !

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  21. जब मन और आत्मा एकरूप एकाकार हो जाते हैं तो विछोह की वेदना स्वयमेव समाप्त हो जाती है ! ऐसे में भूलने या याद करने की स्थिति ही शेष नहीं रह जाती ! आध्यात्मिक रंग में रंगी बहुत ही गहन एवं भावपूर्ण रचना ! अति सुन्दर !

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  22. याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी

    बिल्‍कुल सच ... ।

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  23. याद तो उसे करूँ
    जिसे भुलाया हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जिसे बिसराया हो कभी
    जो स्वयं से जुदा
    हुआ हो कभी
    याद तो उसे करूँ
    जो अलग वजूद
    बना हो कभी
    जो मुझमे समाया रहता है
    जिसमे मैं समायी रहती हूँ


    radha tum aur meera tum .
    utani hi gaharai se shabdon men dhala hai. isake liye bahut bahut abhar.

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  24. बहुत सुन्दर कविता ...

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  25. बहुत अच्छी रचना है वंदना जी
    आपकी कविता पढ़कर...
    अपना एक शेर याद आ रहा है-
    फिर भी उसकी तलाश है मुझको
    वो जो मुझमें छिपा सा रहता है

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  26. सब और तुम्ही तुम हो ....लाजवाब रचना ..

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  27. बहुत बढिया बात याद तो उसे किया जाय जिसे भुलाया हो। ’’उनको हमने न भुलाया न कभी याद किया ""

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  28. Great creation Vandana ji ! Full of love.

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  29. बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने! बेहद पसंद आया!

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