Saturday, March 19, 2011

मै तो हर मोड पर उनको ढूँढा सदा्

मै तो हर मोड  पर
उनको ढूँढा सदा्
होली के बहाने
रंगो को लगाने
ना जाने कौन गली
छुपे हैं सांवरिया
किस बैरन ने
छुपाय लीन्हो
सजनवा हमार
हरण कर लीन्हो
कोई तो पता
बताय दीन्हो
होली म्हारी
सरस कर दीन्हो

टेसू के फ़ूल
कुम्हला गये हैं
अबीर गुलाल भी
रोने लगे हैं
सजन के बिन
मायूस हुये हैं
अब तो पता
बताय दो गुजरिया
फ़ाग को रंग
चढाय दो गुजरिया
हमका सजन से
मिलाय दो गुजरिया
प्रीत रस मे
भीजन दो गुजरिया
हमका सांवरिया से
मिलाय दो गुजरिया
आज प्रेम अटरिया
चढ्न दो बावरिया
होली के बहाने
प्रेम की होली
खेलन दो गुजरिया
श्याम को मेरा
होने दो गुजरिया

20 comments:

  1. सुन्दर रचना!
    आपको पूरे परिवार सहित होली की बहुत-बहुत शूभकामनाएँ!

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  2. होली मुबारक,

    विरहण की रचना , वह भी होली के दिन, काहे रूसा दिये।

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  3. सुंदर कविता के लिए आभार

    होली की शुभकामनाएं।

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  4. होली रंगों के इस त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाये।


    jai baba banaras................

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  6. रंगों की चलाई है हमने पिचकारी
    रहे ने कोई झोली खाली
    हमने हर झोली रंगने की
    आज है कसम खाली

    होली की रंग भरी शुभकामनाएँ

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  7. वंदना जी, रंग भरे इस पर्व पर हार्दिक शुभेच्छा .....

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  8. "गोद में छोरा और नगर में ढिंढोरा"
    वाह! वंदना जी वाह! छिपाए रखा है लला को
    अपने उर में और ढूंढ रही हो सारे जग में.
    "नगरी नगरी द्वारे द्वारे ढूँढूँ रे साँवरिया"
    सही कहा है 'बिनु सत्संग बिबेक न होई'
    फिर देर किस बात की ,जल्दी से सभी ब्लोगर जन के साथ आ जाईये मेरी इसी पोस्ट पर .आपका भ्रम मिट न जायें तो कहना .

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  9. हर मोड़ पर नहीं ज़रा सी गर्दन झुकाइए ...मिल जायेंगे संवरिया ...


    होली की शुभकामनायें :):)

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  10. Ateev sundar rachana!
    Holi bahut mubarak ho!
    Aur mujhe apna cell# dedo naaaaa!!Sim card delete ho gaya hai!

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  11. होली आपके स्वप्न पूरे करे।

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  12. बंदना जी
    होली की हार्दिक शुभकामनायें
    manish jaiswal
    Bilaspur
    chhattisgarh

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  13. waah vandna ji virah ke rang ko bhi kya khoob ubhara hai..holi ki bahut bahut shubhkamnayen!

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  14. होली की हार्दिक शुभकामनायें ...

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  15. सुंदर कविता के लिए आभार
    होली की शुभकामनाएं।

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  16. लाजबाब वन्दना जी

    होली का एक नया ही रूप !

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  17. कहाँ छिपे हैं कान्हा ...गोपियों की भीड़ में होंगे रसिया और कहाँ :):)

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  18. विरह-व्याकुल प्रेम रचना ....स्वयम को भूल गयी सांवरिया से मिलने की चाह में

    अति सुन्दर .....



    होली में कुछ ऐसा भी होता है....

    होली मंगलमय हो ..

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  19. bahut sunder lagi aapki rachna ......

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  20. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने !

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